Saturday, 9 May 2015

अनजानी-सी वजह


जाने कबसे ढूंढ रहा हूँ,
अभी तक मिला नहीं,
आखिर क्या ढूंढ रहा हूँ,
ये भी पता नहीं,
न ठौर है ना ठिकाना,
ना कोई तैयारी है,
बस मन में एक आस है,
और तलाश जारी है...
अब तक मैंने जो भी खोया,
उसका कोई हिसाब नहीं,
कोई अगर पूछे कि क्या पाया,
इसका भी जवाब नहीं,
कोई तो है मेरा बहुत अपना,
कुछ है जो ख़ास है,
शायद कही खो गया है,
जाने किसके पास है,
कभी दिन के तेज उजाले में,
कभी काली रात में,
कभी चिलचिलाती धूप में,
तो कभी बरसात में,
बस उसे ही ढूंढता जाता हूँ,
जो है भी कि नहीं,
एक अनजानी सी वजह है ये,
पूरी होगी कि नहीं,
मन बेचैन है दिल डरा हुआ,
पलकें भारी है,
एक अनबुझी-सी प्यास है सीने में,
और तलाश जारी है !!!

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